पुणे न्यूज डेस्क: पुणे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (PMC) की ओर से शहर में चलाए जा रहे फुटपाथ मरम्मत अभियान पर नागरिक समूह Sajag Nagrik Manch ने सवाल उठाए हैं। मंच का आरोप है कि कई स्थानों पर बिना आवश्यकता अच्छे फुटपाथों को तोड़कर दोबारा टाइल्स और पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, जिससे सार्वजनिक धन की बर्बादी हो रही है। संगठन के प्रतिनिधि विवेक वेलणकर का कहना है कि जिन जगहों पर टाइल्स हाल ही में बदली गई थीं और अभी भी अच्छी स्थिति में हैं, वहां भी दोबारा काम किया जा रहा है।
हालांकि PMC ने इन आरोपों को खारिज किया है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, मरम्मत कार्य जमीनी निरीक्षण के बाद ही शुरू किए गए हैं और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है। सड़क विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन फुटपाथों की हालत खराब पाई गई, वहीं सुधार कार्य की मंजूरी दी गई।
मॉडल कॉलोनी समेत कुछ इलाकों की तस्वीरें साझा करते हुए मंच ने दावा किया है कि अभियान का उद्देश्य अतिक्रमण हटाना और वाहनों की एंट्री रोकने के लिए बैरियर लगाना था, लेकिन इसके बजाय अच्छी टाइल्स को हटाकर दोबारा बिछाया जा रहा है। मंच का कहना है कि शहर में सुरक्षित और चौड़े फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बेहद जरूरी हैं, और योजनाओं को दिखावे के बजाय प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि जनवरी में PMC ने सर्वे के बाद यह अभियान शुरू किया था, जिसमें करीब 42 किलोमीटर फुटपाथ जर्जर हालत में पाए गए थे। निगम का कहना है कि शहर के कई हिस्सों, खासकर पेठ इलाकों में खुदाई और अन्य कार्य—जैसे सीसीटीवी स्थापना—के चलते फुटपाथ प्रभावित हुए हैं। नए अभियान का उद्देश्य टूटे, क्षतिग्रस्त और अतिक्रमित फुटपाथों की मरम्मत कर सुरक्षित और बाधारहित पैदल मार्ग उपलब्ध कराना है।